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Sura 25
Aya 57
57
قُل ما أَسأَلُكُم عَلَيهِ مِن أَجرٍ إِلّا مَن شاءَ أَن يَتَّخِذَ إِلىٰ رَبِّهِ سَبيلًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और उन लोगों से तुम कह दो कि मै इस (तबलीगे रिसालत) पर तुमसे कुछ मज़दूरी तो माँगता नहीं हूँ मगर तमन्ना ये है कि जो चाहे अपने परवरदिगार तक पहुँचने की राह पकडे