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93
۞ إِنَّمَا السَّبيلُ عَلَى الَّذينَ يَستَأذِنونَكَ وَهُم أَغنِياءُ ۚ رَضوا بِأَن يَكونوا مَعَ الخَوالِفِ وَطَبَعَ اللَّهُ عَلىٰ قُلوبِهِم فَهُم لا يَعلَمونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

उनकी ऑंखों से ऑंसू जारी थे (इल्ज़ाम की) सबील तो सिर्फ उन्हीं लोगों पर है जिन्होंने बावजूद मालदार होने के तुमसे (जिहाद में) न जाने की इजाज़त चाही और उनके पीछे रह जाने वाले (औरतों, बच्चों) के साथ रहना पसन्द आया और ख़ुदा ने उनके दिलों पर (गोया) मोहर कर दी है तो ये लोग कुछ नहीं जानते