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38
يا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا ما لَكُم إِذا قيلَ لَكُمُ انفِروا في سَبيلِ اللَّهِ اثّاقَلتُم إِلَى الأَرضِ ۚ أَرَضيتُم بِالحَياةِ الدُّنيا مِنَ الآخِرَةِ ۚ فَما مَتاعُ الحَياةِ الدُّنيا فِي الآخِرَةِ إِلّا قَليلٌ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

ऐ ईमानदारों तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि ख़ुदा की राह में (जिहाद के लिए) निकलो तो तुम लदधड़ (ढीले) हो कर ज़मीन की तरफ झुके पड़ते हो क्या तुम आख़िरत के बनिस्बत दुनिया की (चन्द रोज़ा) जिन्दगी को पसन्द करते थे तो (समझ लो कि) दुनिया की ज़िन्दगी का साज़ो सामान (आख़िर के) ऐश व आराम के मुक़ाबले में बहुत ही थोड़ा है