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24
قُل إِن كانَ آباؤُكُم وَأَبناؤُكُم وَإِخوانُكُم وَأَزواجُكُم وَعَشيرَتُكُم وَأَموالٌ اقتَرَفتُموها وَتِجارَةٌ تَخشَونَ كَسادَها وَمَساكِنُ تَرضَونَها أَحَبَّ إِلَيكُم مِنَ اللَّهِ وَرَسولِهِ وَجِهادٍ في سَبيلِهِ فَتَرَبَّصوا حَتّىٰ يَأتِيَ اللَّهُ بِأَمرِهِ ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الفاسِقينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

कह दो, "यदि तुम्हारे बाप, तुम्हारे बेटे, तुम्हारे भाई, तुम्हारी पत्नि यों और तुम्हारे रिश्ते-नातेवाले और माल, जो तुमने कमाए है और कारोबार जिसके मन्दा पड़ जाने का तुम्हें भय है और घर जिन्हें तुम पसन्द करते हो, तुम्हे अल्लाह और उसके रसूल और उसके मार्ग में जिहाद करने से अधिक प्रिय है तो प्रतीक्षा करो, यहाँ तक कि अल्लाह अपना फ़ैसला ले आए। औऱ अल्लाह अवज्ञाकारियों को मार्ग नहीं दिखाता।"