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2
فَإِذا بَلَغنَ أَجَلَهُنَّ فَأَمسِكوهُنَّ بِمَعروفٍ أَو فارِقوهُنَّ بِمَعروفٍ وَأَشهِدوا ذَوَي عَدلٍ مِنكُم وَأَقيمُوا الشَّهادَةَ لِلَّهِ ۚ ذٰلِكُم يوعَظُ بِهِ مَن كانَ يُؤمِنُ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ ۚ وَمَن يَتَّقِ اللَّهَ يَجعَل لَهُ مَخرَجًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

तो जब ये अपना इद्दा पूरा करने के करीब पहुँचे तो या तुम उन्हें उनवाने शाइस्ता से रोक लो या अच्छी तरह रूख़सत ही कर दो और (तलाक़ के वक्त) अपने लोगों में से दो आदिलों को गवाह क़रार दे लो और गवाहों तुम ख़ुदा के वास्ते ठीक ठीक गवाही देना इन बातों से उस शख़्श को नसीहत की जाती है जो ख़ुदा और रोजे अाख़ेरत पर ईमान रखता हो और जो ख़ुदा से डरेगा तो ख़ुदा उसके लिए नजात की सूरत निकाल देगा