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20
وَيَومَ يُعرَضُ الَّذينَ كَفَروا عَلَى النّارِ أَذهَبتُم طَيِّباتِكُم في حَياتِكُمُ الدُّنيا وَاستَمتَعتُم بِها فَاليَومَ تُجزَونَ عَذابَ الهونِ بِما كُنتُم تَستَكبِرونَ فِي الأَرضِ بِغَيرِ الحَقِّ وَبِما كُنتُم تَفسُقونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और याद करो जिस दिन वे लोग जिन्होंने इनकार किया, आग के सामने पेश किए जाएँगे। (कहा जाएगा), "तुम अपने सांसारिक जीवन में अच्छी रुचिकर चीज़े नष्ट कर बैठे और उनका मज़ा ले चुके। अतः आज तुम्हे अपमानजनक यातना दी जाएगी, क्योंकि तुम धरती में बिना किसी हक़ के घमंड करते रहे और इसलिए कि तुम आज्ञा का उल्लंघन करते रहे।"