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Sura 30
Aya 52
52
فَإِنَّكَ لا تُسمِعُ المَوتىٰ وَلا تُسمِعُ الصُّمَّ الدُّعاءَ إِذا وَلَّوا مُدبِرينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अतः तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकते हो, जबकि वे पीठ फेरे चले जो रहे हों