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83
وَإِذ أَخَذنا ميثاقَ بَني إِسرائيلَ لا تَعبُدونَ إِلَّا اللَّهَ وَبِالوالِدَينِ إِحسانًا وَذِي القُربىٰ وَاليَتامىٰ وَالمَساكينِ وَقولوا لِلنّاسِ حُسنًا وَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَآتُوا الزَّكاةَ ثُمَّ تَوَلَّيتُم إِلّا قَليلًا مِنكُم وَأَنتُم مُعرِضونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और याद करो जब इसराईल की सन्तान से हमने वचन लिया, "अल्लाह के अतिरिक्त किसी की बन्दगी न करोगे; और माँ-बाप के साथ और नातेदारों के साथ और अनाथों और मुहताजों के साथ अच्छा व्यवहार करोगे; और यह कि लोगों से भली बात कहो और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो।" तो तुम फिर गए, बस तुममें से बचे थोड़े ही, और तुम उपेक्षा की नीति ही अपनाए रहे