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144
قَد نَرىٰ تَقَلُّبَ وَجهِكَ فِي السَّماءِ ۖ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبلَةً تَرضاها ۚ فَوَلِّ وَجهَكَ شَطرَ المَسجِدِ الحَرامِ ۚ وَحَيثُ ما كُنتُم فَوَلّوا وُجوهَكُم شَطرَهُ ۗ وَإِنَّ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ لَيَعلَمونَ أَنَّهُ الحَقُّ مِن رَبِّهِم ۗ وَمَا اللَّهُ بِغافِلٍ عَمّا يَعمَلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

हम आकाश में तुम्हारे मुँह की गर्दिश देख रहे है, तो हम अवश्य ही तुम्हें उसी क़िबले का अधिकारी बना देंगे जिसे तुम पसन्द करते हो। अतः मस्जिदे हराम (काबा) की ओर अपना रूख़ करो। और जहाँ कहीं भी हो अपने मुँह उसी की ओर करो - निश्चय ही जिन लोगों को किताब मिली थी, वे भली-भाँति जानते है कि वही उनके रब की ओर से हक़ है, इसके बावजूद जो कुछ वे कर रहे है अल्लाह उससे बेखबर नहीं है