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143
وَكَذٰلِكَ جَعَلناكُم أُمَّةً وَسَطًا لِتَكونوا شُهَداءَ عَلَى النّاسِ وَيَكونَ الرَّسولُ عَلَيكُم شَهيدًا ۗ وَما جَعَلنَا القِبلَةَ الَّتي كُنتَ عَلَيها إِلّا لِنَعلَمَ مَن يَتَّبِعُ الرَّسولَ مِمَّن يَنقَلِبُ عَلىٰ عَقِبَيهِ ۚ وَإِن كانَت لَكَبيرَةً إِلّا عَلَى الَّذينَ هَدَى اللَّهُ ۗ وَما كانَ اللَّهُ لِيُضيعَ إيمانَكُم ۚ إِنَّ اللَّهَ بِالنّاسِ لَرَءوفٌ رَحيمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और इसी प्रकार हमने तुम्हें बीच का एक उत्तम समुदाय बनाया है, ताकि तुम सारे मनुष्यों पर गवाह हो, और रसूल तुमपर गवाह हो। और जिस (क़िबले) पर तुम रहे हो उसे तो हमने केवल इसलिए क़िबला बनाया था कि जो लोग पीठ-पीछे फिर जानेवाले है, उनसे हम उनको अलग जान लें जो रसूल का अनुसरण करते है। और यह बात बहुत भारी (अप्रिय) है, किन्तु उन लोगों के लिए नहीं जिन्हें अल्लाह ने मार्ग दिखाया है। और अल्लाह ऐसा नहीं कि वह तुम्हारे ईमान को अकारथ कर दे, अल्लाह तो इनसानों के लिए अत्यन्त करूणामय, दयावान है