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57
وَمَن أَظلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآياتِ رَبِّهِ فَأَعرَضَ عَنها وَنَسِيَ ما قَدَّمَت يَداهُ ۚ إِنّا جَعَلنا عَلىٰ قُلوبِهِم أَكِنَّةً أَن يَفقَهوهُ وَفي آذانِهِم وَقرًا ۖ وَإِن تَدعُهُم إِلَى الهُدىٰ فَلَن يَهتَدوا إِذًا أَبَدًا

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उस व्यक्ति से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जिसे उसके रब की आयतों के द्वारा समझाया गया, तो उसने उनसे मुँह फेर लिया और उसे भूल गया, जो सामान उसके हाथ आगे बढ़ा चुके है? निश्चय ही हमने उनके दिलों पर परदे डाल दिए है कि कहीं वे उसे समझ न लें और उनके कानों में बोझ डाल दिया (कि कहीं वे सुन न ले) । यद्यपि तुम उन्हें सीधे मार्ग की ओर बुलाओ, वे कभी भी मार्ग नहीं पा सकते