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112
وَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا قَريَةً كانَت آمِنَةً مُطمَئِنَّةً يَأتيها رِزقُها رَغَدًا مِن كُلِّ مَكانٍ فَكَفَرَت بِأَنعُمِ اللَّهِ فَأَذاقَهَا اللَّهُ لِباسَ الجوعِ وَالخَوفِ بِما كانوا يَصنَعونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अल्लाह ने एक मिसाल बयान की है: एक बस्ती थी जो निश्चिन्त और सन्तुष्ट थी। हर जगह से उसकी रोज़ी प्रचुरता के साथ चली आ रही थी कि वह अल्लाह की नेमतों के प्रति अकृतज्ञता दिखाने लगी। तब अल्लाह ने उसके निवासियों को उनकी करतूतों के बदले में भूख का मज़ा चख़ाया और भय का वस्त्र पहनाया