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Sura 11
Aya 55
55
مِن دونِهِ ۖ فَكيدوني جَميعًا ثُمَّ لا تُنظِرونِ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जिनको तुम साझी ठहराकर उसके सिवा पूज्य मानते हो। अतः तुम सब मिलकर मेरे साथ दाँव-घात लगाकर देखो और मुझे मुहलत न दो