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71
۞ وَاتلُ عَلَيهِم نَبَأَ نوحٍ إِذ قالَ لِقَومِهِ يا قَومِ إِن كانَ كَبُرَ عَلَيكُم مَقامي وَتَذكيري بِآياتِ اللَّهِ فَعَلَى اللَّهِ تَوَكَّلتُ فَأَجمِعوا أَمرَكُم وَشُرَكاءَكُم ثُمَّ لا يَكُن أَمرُكُم عَلَيكُم غُمَّةً ثُمَّ اقضوا إِلَيَّ وَلا تُنظِرونِ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और (ऐ रसूल) तुम उनके सामने नूह का हाल पढ़ दो जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मेरा ठहरना और ख़ुदा की आयतों का चर्चा करना तुम पर शाक़ व गिरां (बुरा) गुज़रता है तो मैं सिर्फ ख़ुदा ही पर भरोसा रखता हूँ तो तुम और तुमहारे शरीक़ सब मिलकर अपना काम ठीक कर लो फिर तुम्हारी बात तुम (में से किसी) पर महज़ (छुपी) न रहे फिर (जो तुम्हारा जी चाहे) मेरे साथ कर गुज़रों और गुझे (दम मारने की भी) मोहलत न दो