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Sura 70
Aya 44
44
خاشِعَةً أَبصارُهُم تَرهَقُهُم ذِلَّةٌ ۚ ذٰلِكَ اليَومُ الَّذي كانوا يوعَدونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उनकी निगाहें झुकी होंगी, ज़िल्लत उनपर छा रही होगी। यह है वह दिन जिससे वह डराए जाते रहे है