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Sura 23
Aya 77
77
حَتّىٰ إِذا فَتَحنا عَلَيهِم بابًا ذا عَذابٍ شَديدٍ إِذا هُم فيهِ مُبلِسونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

यहाँ तक कि जब हम उनपर कठोर यातना का द्वार खोल दें तो क्या देखेंगे कि वे उसमें निराश होकर रह गए है