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60
۞ إِنَّمَا الصَّدَقاتُ لِلفُقَراءِ وَالمَساكينِ وَالعامِلينَ عَلَيها وَالمُؤَلَّفَةِ قُلوبُهُم وَفِي الرِّقابِ وَالغارِمينَ وَفي سَبيلِ اللَّهِ وَابنِ السَّبيلِ ۖ فَريضَةً مِنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

सदक़े तो बस ग़रीबों, मुहताजों और उन लोगों के लिए है, जो काम पर नियुक्त हों और उनके लिए जिनके दिलों को आकृष्ट करना औऱ परचाना अभीष्ट हो और गर्दनों को छुड़ाने और क़र्ज़दारों और तावान भरनेवालों की सहायता करने में, अल्लाह के मार्ग में, मुसाफ़िरों की सहायता करने में लगाने के लिए है। यह अल्लाह की ओर से ठहराया हुआ हुक्म है। अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, अत्यन्त तत्वदर्शी है