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60
وَهُوَ الَّذي يَتَوَفّاكُم بِاللَّيلِ وَيَعلَمُ ما جَرَحتُم بِالنَّهارِ ثُمَّ يَبعَثُكُم فيهِ لِيُقضىٰ أَجَلٌ مُسَمًّى ۖ ثُمَّ إِلَيهِ مَرجِعُكُم ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

वह वही (ख़ुदा) है जो तुम्हें रात को (नींद में एक तरह पर दुनिया से) उठा लेता हे और जो कुछ तूने दिन को किया है जानता है फिर तुम्हें दिन को उठा कर खड़ा करता है ताकि (ज़िन्दगी की) (वह) मियाद जो (उसके इल्म में) मुअय्युन है पूरी की जाए फिर (तो आख़िर) तुम सबको उसी की तरफ लौटना है फिर जो कुछ तुम (दुनिया में भला बुरा) करते हो तुम्हें बता देगा