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50
قُل لا أَقولُ لَكُم عِندي خَزائِنُ اللَّهِ وَلا أَعلَمُ الغَيبَ وَلا أَقولُ لَكُم إِنّي مَلَكٌ ۖ إِن أَتَّبِعُ إِلّا ما يوحىٰ إِلَيَّ ۚ قُل هَل يَستَوِي الأَعمىٰ وَالبَصيرُ ۚ أَفَلا تَتَفَكَّرونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

कह दो, "मैं तुमसे यह नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने है, और न मैं परोक्ष का ज्ञान रखता हूँ, और न मैं तुमसे कहता हूँ कि मैं कोई फ़रिश्ता हूँ। मैं तो बस उसी का अनुपालन करता हूँ जो मेरी ओर वह्यं की जाती है।" कहो, "क्या अंधा और आँखोंवाला दोनों बराबर हो जाएँगे? क्या तुम सोच-विचार से काम नहीं लेते?"