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19
قُل أَيُّ شَيءٍ أَكبَرُ شَهادَةً ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ شَهيدٌ بَيني وَبَينَكُم ۚ وَأوحِيَ إِلَيَّ هٰذَا القُرآنُ لِأُنذِرَكُم بِهِ وَمَن بَلَغَ ۚ أَئِنَّكُم لَتَشهَدونَ أَنَّ مَعَ اللَّهِ آلِهَةً أُخرىٰ ۚ قُل لا أَشهَدُ ۚ قُل إِنَّما هُوَ إِلٰهٌ واحِدٌ وَإِنَّني بَريءٌ مِمّا تُشرِكونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

कहो, "किस चीज़ की गवाही सबसे बड़ी है?" कहो, "मेरे और तुम्हारे बीच अल्लाह गवाह है। और यह क़ुरआन मेरी ओर वह्यी (प्रकाशना) किया गया है, ताकि मैं इसके द्वारा तुम्हें सचेत कर दूँ। और जिस किसी को यह अल्लाह के साथ दूसरे पूज्य भी है?" तुम कह दो, "मैं तो इसकी गवाही नहीं देता।" कह दो, "वह तो बस अकेला पूज्य है। और तुम जो उसका साझी ठहराते हो, उससे मेरा कोई सम्बन्ध नहीं।"