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130
يا مَعشَرَ الجِنِّ وَالإِنسِ أَلَم يَأتِكُم رُسُلٌ مِنكُم يَقُصّونَ عَلَيكُم آياتي وَيُنذِرونَكُم لِقاءَ يَومِكُم هٰذا ۚ قالوا شَهِدنا عَلىٰ أَنفُسِنا ۖ وَغَرَّتهُمُ الحَياةُ الدُّنيا وَشَهِدوا عَلىٰ أَنفُسِهِم أَنَّهُم كانوا كافِرينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"ऐ जिन्नों और मनुष्यों के गिरोह! क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे, जो तुम्हें मेरी आयतें सुनाते और इस दिन के पेश आने से तुम्हें डराते थे?" वे कहेंगे, "क्यों नहीं! (रसूल तो आए थे) हम स्वयं अपने विरुद्ध गवाह है।" उन्हें तो सांसारिक जीवन ने धोखे में रखा। मगर अब वे स्वयं अपने विरुद्ध गवाही देने लगे कि वे इनकार करनेवाले थे