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114
أَفَغَيرَ اللَّهِ أَبتَغي حَكَمًا وَهُوَ الَّذي أَنزَلَ إِلَيكُمُ الكِتابَ مُفَصَّلًا ۚ وَالَّذينَ آتَيناهُمُ الكِتابَ يَعلَمونَ أَنَّهُ مُنَزَّلٌ مِن رَبِّكَ بِالحَقِّ ۖ فَلا تَكونَنَّ مِنَ المُمتَرينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अब क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और निर्णायक ढूढूँ? हालाँकि वही है जिसने तुम्हारी ओर किताब अवतरित की है, जिसमें बातें खोल-खोलकर बता दी गई है और जिन लोगों को हमने किताब प्रदान की थी, वे भी जानते है कि यह तुम्हारे रब की ओर से हक़ के साथ अवतरित हुई है, तो तुम कदापि सन्देह में न पड़ना