15فَاليَومَ لا يُؤخَذُ مِنكُم فِديَةٌ وَلا مِنَ الَّذينَ كَفَروا ۚ مَأواكُمُ النّارُ ۖ هِيَ مَولاكُم ۖ وَبِئسَ المَصيرُफ़ारूक़ ख़ान & अहमद"अब आज न तुमसे कोई फ़िदया (मुक्ति-प्रतिदान) लिया जाएगा और न उन लोगों से जिन्होंने इनकार किया। तुम्हारा ठिकाना आग है, और वही तुम्हारी संरक्षिका है। और बहुत ही बुरी जगह है अन्त में पहुँचने की!"