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29
فَذَكِّر فَما أَنتَ بِنِعمَتِ رَبِّكَ بِكاهِنٍ وَلا مَجنونٍ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

तो (ऐ रसूल) तुम नसीहत किए जाओ तो तुम अपने परवरदिगार के फज़ल से न काहिन हो और न मजनून किया