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81
وَيَقولونَ طاعَةٌ فَإِذا بَرَزوا مِن عِندِكَ بَيَّتَ طائِفَةٌ مِنهُم غَيرَ الَّذي تَقولُ ۖ وَاللَّهُ يَكتُبُ ما يُبَيِّتونَ ۖ فَأَعرِض عَنهُم وَتَوَكَّل عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ وَكيلًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(ये लोग तुम्हारे सामने) तो कह देते हैं कि हम (आपके) फ़रमाबरदार हैं लेकिन जब तुम्हारे पास से बाहर निकले तो उनमें से कुछ लोग जो कुछ तुमसे कह चुके थे उसके ख़िलाफ़ रातों को मशवरा करते हैं हालॉकि (ये नहीं समझते) ये लोग रातों को जो कुछ भी मशवरा करते हैं उसे ख़ुदा लिखता जाता है पास तुम उन लोगों की कुछ परवाह न करो और ख़ुदा पर भरोसा रखो और ख़ुदा कारसाज़ी के लिए काफ़ी है