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68
وَمَن نُعَمِّرهُ نُنَكِّسهُ فِي الخَلقِ ۖ أَفَلا يَعقِلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और हम जिस शख्स को (बहुत) ज्यादा उम्र देते हैं तो उसे ख़िलक़त में उलट (कर बच्चों की तरह मजबूर कर) देते हैं तो क्या वह लोग समझते नहीं