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44
أَوَلَم يَسيروا فِي الأَرضِ فَيَنظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الَّذينَ مِن قَبلِهِم وَكانوا أَشَدَّ مِنهُم قُوَّةً ۚ وَما كانَ اللَّهُ لِيُعجِزَهُ مِن شَيءٍ فِي السَّماواتِ وَلا فِي الأَرضِ ۚ إِنَّهُ كانَ عَليمًا قَديرًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

तो क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर कर नहीं देखा कि जो लोग उनके पहले थे और उनसे ज़ोर व कूवत में भी कहीं बढ़-चढ़ के थे फिर उनका (नाफ़रमानी की वजह से) क्या (ख़राब) अन्जाम हुआ और खुदा ऐसा (गया गुज़रा) नहीं है कि उसे कोई चीज़ आजिज़ कर सके (न इतने) आसमानों में और न ज़मीन में बेशक वह बड़ा ख़बरदार (और) बड़ी (क़ाबू) कुदरत वाला है