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28
ضَرَبَ لَكُم مَثَلًا مِن أَنفُسِكُم ۖ هَل لَكُم مِن ما مَلَكَت أَيمانُكُم مِن شُرَكاءَ في ما رَزَقناكُم فَأَنتُم فيهِ سَواءٌ تَخافونَهُم كَخيفَتِكُم أَنفُسَكُم ۚ كَذٰلِكَ نُفَصِّلُ الآياتِ لِقَومٍ يَعقِلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उसने तुम्हारे लिए स्वयं तुम्हीं में से एक मिसाल पेश की है। क्या जो रोज़ी हमने तुम्हें दी है, उसमें तुम्हारे अधीनस्थों में से, कुछ तुम्हारे साझीदार है कि तुम सब उसमें बराबर के हो, तुम उनका ऐसा डर रखते हो जैसा अपने लोगों का डर रखते हो? - इसप्रकार हम उन लोगों के लिए आयतें खोल-खोलकर प्रस्तुत करते है जो बुद्धि से काम लेते है। -