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119
ها أَنتُم أُولاءِ تُحِبّونَهُم وَلا يُحِبّونَكُم وَتُؤمِنونَ بِالكِتابِ كُلِّهِ وَإِذا لَقوكُم قالوا آمَنّا وَإِذا خَلَوا عَضّوا عَلَيكُمُ الأَنامِلَ مِنَ الغَيظِ ۚ قُل موتوا بِغَيظِكُم ۗ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

ये चो तुम हो जो उनसे प्रेम करते हो और वे तुमसे प्रेम नहीं करते, जबकि तुम समस्त किताबों पर ईमान रखते हो। और वे जब तुमसे मिलते है तो कहने को तो कहते है कि "हम ईमान लाए है।" किन्तु जब वे अलग होते है तो तुमपर क्रोध के मारे दाँतों से उँगलियाँ काटने लगते है। कह दो, "तुम अपने क्रोध में आप मरो। निस्संदेह अल्लाह दिलों के भेद को जानता है।"