You are here: Home » Chapter 28 » Verse 82 » Translation
← Sura 28 →
← Aya 82 →
82
وَأَصبَحَ الَّذينَ تَمَنَّوا مَكانَهُ بِالأَمسِ يَقولونَ وَيكَأَنَّ اللَّهَ يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ وَيَقدِرُ ۖ لَولا أَن مَنَّ اللَّهُ عَلَينا لَخَسَفَ بِنا ۖ وَيكَأَنَّهُ لا يُفلِحُ الكافِرونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और जिन लोगों ने कल उसके जाह व मरतबे की तमन्ना की थी वह (आज ये तमाशा देखकर) कहने लगे अरे माज़अल्लाह ये तो ख़ुदा ही अपने बन्दों से जिसकी रोज़ी चाहता है कुशादा कर देता है और जिसकी रोज़ी चाहता है तंग कर देता है और अगर (कहीं) ख़ुदा हम पर मेहरबानी न करता (और इतना माल दे देता) तो उसकी तरह हमको भी ज़रुर धॅसा देता-और माज़अल्लाह (सच है) हरगिज़ कुफ्फार अपनी मुरादें न पाएँगें