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44
قيلَ لَهَا ادخُلِي الصَّرحَ ۖ فَلَمّا رَأَتهُ حَسِبَتهُ لُجَّةً وَكَشَفَت عَن ساقَيها ۚ قالَ إِنَّهُ صَرحٌ مُمَرَّدٌ مِن قَواريرَ ۗ قالَت رَبِّ إِنّي ظَلَمتُ نَفسي وَأَسلَمتُ مَعَ سُلَيمانَ لِلَّهِ رَبِّ العالَمينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उससे कहा गया कि "महल में प्रवेश करो।" तो जब उसने उसे देखा तो उसने उसको गहरा पानी समझा और उसने अपनी दोनों पिंडलियाँ खोल दी। उसने कहा, "यह तो शीशे से निर्मित महल है।" बोली, "ऐ मेरे रब! निश्चय ही मैंने अपने आपपर ज़ुल्म किया। अब मैंने सुलैमान के साथ अपने आपको अल्लाह के समर्पित कर दिया, जो सारे संसार का रब है।"