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40
قالَ الَّذي عِندَهُ عِلمٌ مِنَ الكِتابِ أَنا آتيكَ بِهِ قَبلَ أَن يَرتَدَّ إِلَيكَ طَرفُكَ ۚ فَلَمّا رَآهُ مُستَقِرًّا عِندَهُ قالَ هٰذا مِن فَضلِ رَبّي لِيَبلُوَني أَأَشكُرُ أَم أَكفُرُ ۖ وَمَن شَكَرَ فَإِنَّما يَشكُرُ لِنَفسِهِ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ رَبّي غَنِيٌّ كَريمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जिस व्यक्ति के पास किताब का ज्ञान था, उसने कहा, "मैं आपकी पलक झपकने से पहले उसे आपके पास लाए देता हूँ।" फिर जब उसने उसे अपने पास रखा हुआ देखा तो कहा, "यह मेरे रब का उदार अनुग्रह है, ताकि वह मेरी परीक्षा करे कि मैं कृतज्ञता दिखाता हूँ या कृतघ्न बनता हूँ। जो कृतज्ञता दिखलाता है तो वह अपने लिए ही कृतज्ञता दिखलाता है और वह जिसने कृतघ्नता दिखाई, तो मेरा रब निश्चय ही निस्पृह, बड़ा उदार है।"