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90
بِئسَمَا اشتَرَوا بِهِ أَنفُسَهُم أَن يَكفُروا بِما أَنزَلَ اللَّهُ بَغيًا أَن يُنَزِّلَ اللَّهُ مِن فَضلِهِ عَلىٰ مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ ۖ فَباءوا بِغَضَبٍ عَلىٰ غَضَبٍ ۚ وَلِلكافِرينَ عَذابٌ مُهينٌ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

क्या ही बुरा है वह काम जिसके मुक़ाबले में (इतनी बात पर) वह लोग अपनी जानें बेच बैठे हैं कि खुदा अपने बन्दों से जिस पर चाहे अपनी इनायत से किताब नाज़िल किया करे इस रश्क से जो कुछ खुदा ने नाज़िल किया है सबका इन्कार कर बैठे पस उन पर ग़ज़ब पर ग़ज़ब टूट पड़ा और काफ़िरों के लिए (बड़ी) रूसवाई का अज़ाब है