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77
فَانطَلَقا حَتّىٰ إِذا أَتَيا أَهلَ قَريَةٍ استَطعَما أَهلَها فَأَبَوا أَن يُضَيِّفوهُما فَوَجَدا فيها جِدارًا يُريدُ أَن يَنقَضَّ فَأَقامَهُ ۖ قالَ لَو شِئتَ لَاتَّخَذتَ عَلَيهِ أَجرًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

ग़रज़ (ये सब हो हुआ कर फिर) दोनों आगे चले यहाँ तक कि जब एक गाँव वालों के पास पहुँचे तो वहाँ के लोगों से कुछ खाने को माँगा तो उन लोगों ने दोनों को मेहमान बनाने से इन्कार कर दिया फिर उन दोनों ने उसी गाँव में एक दीवार को देखा कि गिरा ही चाहती थी तो खिज्र ने उसे सीधा खड़ा कर दिया उस पर मूसा ने कहा अगर आप चाहते तो (इन लोगों से) इसकी मज़दूरी ले सकते थे