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69
أَم أَمِنتُم أَن يُعيدَكُم فيهِ تارَةً أُخرىٰ فَيُرسِلَ عَلَيكُم قاصِفًا مِنَ الرّيحِ فَيُغرِقَكُم بِما كَفَرتُم ۙ ثُمَّ لا تَجِدوا لَكُم عَلَينا بِهِ تَبيعًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

या तुमको इसका भी इत्मेनान हो गया कि फिर तुमको दोबारा इसी समन्दर में ले जाएगा उसके बाद हवा का एक ऐसा झोका जो (जहाज़ के) परख़चे उड़ा दे तुम पर भेजे फिर तुम्हें तुम्हारे कुफ्र की सज़ा में डुबा मारे फिर तुम किसी को (ऐसा हिमायती) न पाओगे जो हमारा पीछा करे और (तुम्हें छोड़ा जाए)