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76
وَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا رَجُلَينِ أَحَدُهُما أَبكَمُ لا يَقدِرُ عَلىٰ شَيءٍ وَهُوَ كَلٌّ عَلىٰ مَولاهُ أَينَما يُوَجِّههُ لا يَأتِ بِخَيرٍ ۖ هَل يَستَوي هُوَ وَمَن يَأمُرُ بِالعَدلِ ۙ وَهُوَ عَلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अल्लाह ने एक और मिसाल पेश की है: दो व्यक्ति है। उनमें से एक गूँगा है। किसी चीज़ पर उसे अधिकार प्राप्त नहीं। वह अपने स्वामी पर एक बोझ है - उसे वह जहाँ भेजता है, कुछ भला करके नहीं लाता। क्या वह और जो न्याय का आदेश देता है और स्वयं भी सीधे मार्ग पर है वह, समान हो सकते है?