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4
وَفِي الأَرضِ قِطَعٌ مُتَجاوِراتٌ وَجَنّاتٌ مِن أَعنابٍ وَزَرعٌ وَنَخيلٌ صِنوانٌ وَغَيرُ صِنوانٍ يُسقىٰ بِماءٍ واحِدٍ وَنُفَضِّلُ بَعضَها عَلىٰ بَعضٍ فِي الأُكُلِ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَعقِلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और धरती में पास-पास भूभाग पाए जाते है जो परस्पर मिले हुए है, और अंगूरों के बाग़ है और खेतियाँ है औऱ खजूर के पेड़ है, इकहरे भी और दोहरे भी। सबको एक ही पानी से सिंचित करता है, फिर भी हम पैदावार और स्वाद में किसी को किसी के मुक़ाबले में बढ़ा देते है। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं, जो बुद्धि से काम लेते है