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3
وَأَنِ استَغفِروا رَبَّكُم ثُمَّ توبوا إِلَيهِ يُمَتِّعكُم مَتاعًا حَسَنًا إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى وَيُؤتِ كُلَّ ذي فَضلٍ فَضلَهُ ۖ وَإِن تَوَلَّوا فَإِنّي أَخافُ عَلَيكُم عَذابَ يَومٍ كَبيرٍ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुर्ज़गी को उसकी बुर्जुगी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर है