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53
ذٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ لَم يَكُ مُغَيِّرًا نِعمَةً أَنعَمَها عَلىٰ قَومٍ حَتّىٰ يُغَيِّروا ما بِأَنفُسِهِم ۙ وَأَنَّ اللَّهَ سَميعٌ عَليمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

ये सज़ा इस वजह से (दी गई) कि जब कोई नेअमत ख़ुदा किसी क़ौम को देता है तो जब तक कि वह लोग ख़ुद अपनी कलबी हालत (न) बदलें ख़ुदा भी उसे नहीं बदलेगा और ख़ुदा तो यक़ीनी (सब की सुनता) और सब कुछ जानता है