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19
إِن تَستَفتِحوا فَقَد جاءَكُمُ الفَتحُ ۖ وَإِن تَنتَهوا فَهُوَ خَيرٌ لَكُم ۖ وَإِن تَعودوا نَعُد وَلَن تُغنِيَ عَنكُم فِئَتُكُم شَيئًا وَلَو كَثُرَت وَأَنَّ اللَّهَ مَعَ المُؤمِنينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(काफ़िर) अगर तुम ये चाहते हो (कि जो हक़ पर हो उसकी) फ़तेह हो (मुसलमानों की) फ़तेह भी तुम्हारे सामने आ मौजूद हुई अब क्या गुरूर बाक़ी है और अगर तुम (अब भी मुख़तलिफ़ इस्लाम) से बाज़ रहो तो तुम्हारे वास्ते बेहतर है और अगर कहीं तुम पलट पड़े तो (याद रहे) हम भी पलट पड़ेगें (और तुम्हें तबाह कर छोड़ देगें) और तुम्हारी जमाअत अगरचे बहुत ज्यादा भी हो हरगिज़ कुछ काम न आएगी और ख़ुदा तो यक़ीनी मामिनीन के साथ है