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7
يوفونَ بِالنَّذرِ وَيَخافونَ يَومًا كانَ شَرُّهُ مُستَطيرًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

ये वह लोग हैं जो नज़रें पूरी करते हैं और उस दिन से जिनकी सख्ती हर तरह फैली होगी डरते हैं