88۞ قالَ المَلَأُ الَّذينَ استَكبَروا مِن قَومِهِ لَنُخرِجَنَّكَ يا شُعَيبُ وَالَّذينَ آمَنوا مَعَكَ مِن قَريَتِنا أَو لَتَعودُنَّ في مِلَّتِنا ۚ قالَ أَوَلَو كُنّا كارِهينَफ़ारूक़ ख़ान & अहमदउनकी क़ौम के सरदारों ने, जो घमंड में पड़े थे, कहा, "ऐ शुऐब! हम तुझे और तेरे साथ उन लोगों को, जो ईमान लाए है, अपनी बस्ती से निकालकर रहेंगे। या फिर तुम हमारे पन्थ में लौट आओ।" उसने कहा, "क्या (तुम यही चाहोगे) यद्यपि यह हमें अप्रिय हो जब भी?