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67
لِكُلِّ نَبَإٍ مُستَقَرٌّ ۚ وَسَوفَ تَعلَمونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और जब तुम उन लोगों को देखो जो हमारी आयतों में बेहूदा बहस कर रहे हैं तो उन (के पास) से टल जाओ यहाँ तक कि वह लोग उसके सिवा किसी और बात में बहस करने लगें और अगर (हमारा ये हुक्म) तुम्हें शैतान भुला दे तो याद आने के बाद ज़ालिम लोगों के साथ हरगिज़ न बैठना