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65
قُل هُوَ القادِرُ عَلىٰ أَن يَبعَثَ عَلَيكُم عَذابًا مِن فَوقِكُم أَو مِن تَحتِ أَرجُلِكُم أَو يَلبِسَكُم شِيَعًا وَيُذيقَ بَعضَكُم بَأسَ بَعضٍ ۗ انظُر كَيفَ نُصَرِّفُ الآياتِ لَعَلَّهُم يَفقَهونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि वही उस पर अच्छी तरह क़ाबू रखता है कि अगर (चाहे तो) तुम पर अज़ाब तुम्हारे (सर के) ऊपर से नाज़िल करे या तुम्हारे पॉव के नीचे से (उठाकर खड़ा कर दे) या एक गिरोह को दूसरे से भिड़ा दे और तुम में से कुछ लोगों को बाज़ आदमियों की लड़ाई का मज़ा चखा दे ज़रा ग़ौर तो करो हम किस किस तरह अपनी आयतों को उलट पुलट के बयान करते हैं ताकि लोग समझे