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71
وَحَسِبوا أَلّا تَكونَ فِتنَةٌ فَعَموا وَصَمّوا ثُمَّ تابَ اللَّهُ عَلَيهِم ثُمَّ عَموا وَصَمّوا كَثيرٌ مِنهُم ۚ وَاللَّهُ بَصيرٌ بِما يَعمَلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और समझ लिया कि (इसमें हमारे लिए) कोई ख़राबी न होगी पस (गोया) वह लोग (अम्र हक़ से) अंधे और बहरे बन गए (मगर बावजूद इसके) जब इन लोगों ने तौबा की तो फिर ख़ुदा ने उनकी तौबा क़ुबूल कर ली (मगर) फिर (इस पर भी) उनमें से बहुतेरे अंधे और बहरे बन गए और जो कुछ ये लोग कर रहे हैं अल्लाह तो देखता है