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116
وَإِذ قالَ اللَّهُ يا عيسَى ابنَ مَريَمَ أَأَنتَ قُلتَ لِلنّاسِ اتَّخِذوني وَأُمِّيَ إِلٰهَينِ مِن دونِ اللَّهِ ۖ قالَ سُبحانَكَ ما يَكونُ لي أَن أَقولَ ما لَيسَ لي بِحَقٍّ ۚ إِن كُنتُ قُلتُهُ فَقَد عَلِمتَهُ ۚ تَعلَمُ ما في نَفسي وَلا أَعلَمُ ما في نَفسِكَ ۚ إِنَّكَ أَنتَ عَلّامُ الغُيوبِ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और याद करो जब अल्लाह कहेगा, "ऐ मरयम के बेटे ईसा! क्या तुमने लोगों से कहा था कि अल्लाह के अतिरिक्त दो और पूज्य मुझ और मेरी माँ को बना लो?" वह कहेगा, "महिमावान है तू! मुझसे यह नहीं हो सकता कि मैं यह बात कहूँ, जिसका मुझे कोई हक़ नहीं है। यदि मैंने यह कहा होता तो तुझे मालूम होता। तू जानता है, जो कुछ मेरे मन में है। परन्तु मैं नहीं जानता जो कुछ तेरे मन में है। निश्चय ही, तू छिपी बातों का भली-भाँति जाननेवाला है