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107
فَإِن عُثِرَ عَلىٰ أَنَّهُمَا استَحَقّا إِثمًا فَآخَرانِ يَقومانِ مَقامَهُما مِنَ الَّذينَ استَحَقَّ عَلَيهِمُ الأَولَيانِ فَيُقسِمانِ بِاللَّهِ لَشَهادَتُنا أَحَقُّ مِن شَهادَتِهِما وَمَا اعتَدَينا إِنّا إِذًا لَمِنَ الظّالِمينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर यदि पता चल जाए कि उन दोनों ने हक़ मारकर अपने को गुनाह में डाल लिया है, तो उनकी जगह दूसरे दो व्यक्ति उन लोगों में से खड़े हो जाएँ, जिनका हक़ पिछले दोनों ने मारना चाहा था, फिर वे दोनों अल्लाह की क़समें खाएँ कि "हम दोनों की गवाही उन दोनों की गवाही से अधिक सच्ची है और हमने कोई ज़्यादती नहीं की है। निस्सन्देह हमने ऐसा किया तो अत्याचारियों में से होंगे।"