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14
۞ قالَتِ الأَعرابُ آمَنّا ۖ قُل لَم تُؤمِنوا وَلٰكِن قولوا أَسلَمنا وَلَمّا يَدخُلِ الإيمانُ في قُلوبِكُم ۖ وَإِن تُطيعُوا اللَّهَ وَرَسولَهُ لا يَلِتكُم مِن أَعمالِكُم شَيئًا ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

अरब के देहाती कहते हैं कि हम ईमान लाए (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम ईमान नहीं लाए बल्कि (यूँ) कह दो कि इस्लाम लाए हालॉकि ईमान का अभी तक तुम्हारे दिल में गुज़र हुआ ही नहीं और अगर तुम ख़ुदा की और उसके रसूल की फरमाबरदारी करोगे तो ख़ुदा तुम्हारे आमाल में से कुछ कम नहीं करेगा - बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है