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14
وَما تَفَرَّقوا إِلّا مِن بَعدِ ما جاءَهُمُ العِلمُ بَغيًا بَينَهُم ۚ وَلَولا كَلِمَةٌ سَبَقَت مِن رَبِّكَ إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى لَقُضِيَ بَينَهُم ۚ وَإِنَّ الَّذينَ أورِثُوا الكِتابَ مِن بَعدِهِم لَفي شَكٍّ مِنهُ مُريبٍ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उन्होंने तो परस्पर एक-दूसरे पर ज़्यादती करने के उद्देश्य से इसके पश्चात विभेद किया कि उनके पास ज्ञान आ चुका था। और यदि तुम्हारे रब की ओर से एक नियत अवधि तक के लिए बात पहले निश्चित न हो चुकी होती तो उनके बीच फ़ैसला चुका दिया गया होता। किन्तु जो लोग उनके पश्चात किताब के वारिस हुए वे उसकी ओर से एक उलझन में डाल देनेवाले संदेह में पड़े हुए है