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119
وَلَأُضِلَّنَّهُم وَلَأُمَنِّيَنَّهُم وَلَآمُرَنَّهُم فَلَيُبَتِّكُنَّ آذانَ الأَنعامِ وَلَآمُرَنَّهُم فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلقَ اللَّهِ ۚ وَمَن يَتَّخِذِ الشَّيطانَ وَلِيًّا مِن دونِ اللَّهِ فَقَد خَسِرَ خُسرانًا مُبينًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और फिर उन्हें ज़रूर गुमराह करूंगा और उन्हें बड़ी बड़ी उम्मीदें भी ज़रूर दिलाऊंगा और यक़ीनन उन्हें सिखा दूंगा फिर वो (बुतों के वास्ते) जानवरों के काम ज़रूर चीर फाड़ करेंगे और अलबत्ता उनसे कह दूंगा बस फिर वो (मेरी तालीम के मुवाफ़िक़) ख़ुदा की बनाई हुई सूरत को ज़रूर बदल डालेंगे और (ये याद रहे कि) जिसने ख़ुदा को छोड़कर शैतान को अपना सरपरस्त बनाया तो उसने खुल्लम खुल्ला सख्त घाटा उठाया